लाला जी की दुकान पर चीनी लेने जाओ या सब्जी वाले के यहाँ से आलू, चाहे डोमिनोस का पिज्जा लो या सत्कार वाले का केक..सामान निकालने से पहले आज कल दुकानदार पालीथीन निकालते है. अक्सर हम दुकानदार से अतिरिक्त पालीथीन मांग लेते है.औरतों के लिए तो एक भगवान् का वरदान है.इसमें वोह अपने मेकअप के सामान दुनिया से छुपा छुपाकर ले ज़ाती है. लड़के अपनी प्रेमिकाओ को तोहफे भी इसमें छिपा छिपाकर देते है. हर वर्ग का इन्सान कहीं न कहीं इस घातक पदार्थ से जुरा है. अरे-ये क्या मैंने इसे घातक बोल दिया... वैसे सही तो बोला ये घातक ही तो है. पर इसका इस्तेमाल करने वाले शायद इससे अनजान है तभी तो धरल्ले से इसका इस्तेमाल बेफिक्र होके किए चले जाते है और भूल जाते हैं की हमारी गलती की सजा हमें सामने से आकर मिलेगी.अब चाहे वो इंसान हो या जानवर हर कोई प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण से जुडी हुई है पर फिर भी न जाने क्यूँ हम सब वो हर काम करते है जिससे कहीं न कहीं प्रकृति पर विपरीत असर होता है. हम perr काटते है, मजे से ऐ सी की हवा लेते हैं, पालीथीन का इस्तेमाल धरल्ले से करे जाते है. पर आज जो हमारी सुख सुविधा के साधन है वो कहीं न कहीं हमारी आने वाली पीढ़ी को नुक्सान पहुंचाएंगे. पालीथीन का इस्तेमाल भी इसी का एक हिस्सा है जो एक चिंता का विषय है. यमुना हो या गंगा हर नदी की लोग पूजा करते हैं. कहते हैं की गंगा नहाने से पाप धुल जाते हैं पर क्या आप जानते हैं की धीरे धीरे पालीथीन नदिओं को पाट रहीं है. धीरे धीरे पालीथीन इनके किनारे में जमा होकर इनको दूषित करती है. ये पानी में भी नहीं घुलती जिसकी वजह से कहीं किनारों पर जमा हो ज़ाती है. अगर इसका ऐसे ही भारी मात्रा में प्रयोग होता रहा तो एक दिन यह अपनी जगह नदिओं में, पार्कों में, सरकों पे अपनी जगह बना लेंगी. फिर आप बहार निकलेंगे तो दिखेगी बस पालीथीन. अभी पालीथीन मांगते मांगते थक जाते हैं, फिर पालीथीन देखते देखते थक जायेंगे. एक और प्रकृति है पालीथीन की ये जलने के बाद हवा में घुल ज़ाती है और जहरीली वायु पैदा करती है जो निश्चित रूप से इसकी एक चिंताजनक कमी है. हम लोग गाय को अपनी माता मानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं की हर साल पूरी दुनिया में करीब १०,००० जानवर जैसी की गाय, कछुए, मछली आदि पालीथीन की वजह से अपने जीवन गँवा देते हैं. वे गलती से इसका सेवन कर लेते हैं और इसकी वजह से मर जाते हैं और इस बात की पुष्टि डोक्टरों ने जानवरों के पोस्त्मार्तेम के बाद करी है. पालीथीन को होने में १०००० साल लग जाते हैं जिसमे पीढ़ी दर पीढ़ी गुजर ज़ाती है.एक ख़ास बात यह है की ये पेट्रोल से बनायीं ज़ाती है जो की एक अनमोल पदार्थ है और आज के ज़माने में तो इसको बर्बाद करना सही नहीं है. हाल ही में उत्तर प्रदेश के शहर आगरा में पालीथीन के विरोध में अभियान हुआ. नगर निगम के तत्वाधान में लोगों ने पालीथीन न इस्तेमाल करने का संकल्प लिया. इन सबके लिए आगरा में लोगो ने १७ कि.मि कि लम्बी मानव श्रुन्क्ला बनायीं जिसमे भारी मात्रा में समाजसेवी, बच्चों, अधिकारी, नेता और शहर कि नामी गिरामी हस्तिओं ने बढ़ चरकर हिस्सा लिया.पूरे शहर को इस मुहीम से जोरकर यह संकल्प लिया गया कि अब पालीथीन का इस्तेमाल बंद करना होगा. निश्चित रूप से ये सब संभव हो सकता है क्यूंकि जब जनता किसी अभियान से जुर ज़ाती है तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता.सबको एक साथ नारे लगाते देखकर ऐसा लग रहा था कि सच में यदि आपसी एकजुटता हो तो बारे से बारे पहर तक तो हम काट सकतें है तो फिर यह तो पालीथीन कि बात है.पर प्रशासन को अभियान के बाद भी सख्ती बरतनी होगी.नगर निगम ने पहले भी कई अभियान चलाये लेकिन वोह सारे असफल हुए थे पर किसी अभियान में इतनी भारी मात्रा में जनता एकत्रित नहीं हुई थी.एक बात तो है कि जब हम बदलेंगे तभी देश बदलेगा. यहाँ पर बनी १७ कि.मि कि श्रंक्ला को गिनिस बुक में डाला जायेगा. ऐसा नही है कि इससे पहले इतनी लम्बी मानव श्रंक्ला नहीं बनी. बंगलादेश में और तेलागना मुद्दे पर भी इससे बरी मानव श्रंक्ला बन चुकी है लेकिन ये ऐसे मामले नहीं थे जो पूरी तरह से सामाजिक हो. इसमें कुछ लोग पक्ष में थे और कुछ नहीं पर आगरा के पालीथीन विरोधी मसले पे सब लोग एकजुट थे और ये पूरी जनता के हित में था.चाहे किसी भी पार्टी के नेताजी हो, इस दिन सबने हाथ में हाथ डालकर नारे लगाये और संकल्प लिया कि अब आगरा में पालीथीन नहीं चलेगी. और इसका असर भी देखने को मिल गया. कई दुकानदारों ने अपने यहाँ पालीथीन विरोधी पोस्टर लगाये, कई लोगों ने लिखा कि- पालीथीन अब हमारे यहाँ बंद हो गई है तो ग्राहकों से निवेदन है कि अपने साथ झोला लेकर आयें. ये बातें इस मुहीम कि सफलता का परिचायक है.
हालाँकि पालीथीन के मजबूत विकल्प को भी ढून्ढ लिया गया है और यह हैं biodegradable carry बैग जो कि ईको फ्रेंडली है. पर हाँ थोरी महंगी जरुर है पर ये कुछ दिन अपने आप नष्ट हो जाति है धुप, पानी के संपर्क में आकर.
लेखक की कलम से
आगरा ने एक बहुत अच्छी मुहीम कि शुरुआत कि. इस घातक पदार्थ के विरोध में जिस तरह से लोग एकत्रित हुए उससे यह बात तो साफ़ हो गई है कि प्रशाशन कि म्हणत रंग लायी पर देखना यह होगा कि यह कितने दिन के लिए है. हाँ एक बात है कि अब हम लोग धीरे धीरे परिपक्व हो गए हैं और अपना भला बुरा समझने लगे है. बेहतर होगा कि अब हम इसका इस्तेमाल बंद करें और धीरे धीरे हर उस सुख सुविधा को त्याग दे जो कल जाकर हमारे लिए मौत का सबब बने. अब केवल आगरा में ही नहीं बल्कि पूरे देश में ये मुहीम छिरनी चाहिए और हर जगह इसका इस्तेमाल पूरी तरह से बंद होना चाहिए. आइये मिल कर कहे एक बार- पालीथीन हटाओ पर्यावरण बचाओ.
मैं कोई पत्रकार या लेखक नहीं हूँ पर मैं पत्रकार बनना चाहता हूँ. इसलिए अगर मैंने कुछ भी गलत लिखा हो तो आप मुझे बताएं ताकि मैं उनमे सुधार कर सकूँ. मैं आपकी तिप्रिओं का स्वागत करता हूँ. फिर मिलेंगे मेरे अगले आलेख में. मुझे अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद. मैं आपका आभारी रहूँगा.
सागर गुजराती
9639083851
.
nice bhai.....
ReplyDeleteor hum sb ko sath milkal polythene ka virod krna chahiye...
me tumhare sath hu...