Monday, January 24, 2011

क्या सुरक्षित है बालिका..बालिका दिवस पर विशेष

आज बालिका दिवस है इसलिए आज इस लेख को लिखने का एक औचित्य है| केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यौन रक्षा विधेयक-२०१० को मंजूरी देकर कामकाजी महिलाओं को काफी हद तक राहत दी है पर सोचने वाली बात है कि आम महिला जो रस्ते पे चलती है, आम लड़की जो पढने ज़ाती है, जो किसी के घर पे काम करती है वह आये दिन शोषण का शिकार होती है| कभी विधायक अपनी नौकरानी के साथ बलात्कार करते हैं तो कभी बड़ा फिल्म स्टार ऐसे कारनामे करता है| इसके अलावा और भी कई तरीके से आये दिन स्त्रियाँ किसी न किसी रूप में प्रतारना का शिकार होती हैं| रास्ते चलती लड़की को देख सीटी मारना, भद्दे तरीके के शब्द इस्तेमाल करना, छेड़ना तो जैसे फैशन बन चुका है| चाहे वो रिक्शा चालक हो,गली में बाल बिखरा के घूमता युवक हो या फिर लग्जरी गाडी में चलता हुआ कोई धन्ना सेठ, लड़कियों की इज्ज़त करना बहुत कम ही लोग जानते हैं| कई बार तो यह मनचले लड़कियों का पीछा करते करते इनके घर तक जाने से भी बाज नहीं आते| पर इस बात का विरोध बहुत कम लड़कियां ही करती हैं क्यूंकि कई बार आरोप लगाने वाली लड़की को ही शक के दायरे में डाल दिया जाता है और उसके ही चाल चलन पर सवाल उठा दिए जाते है| लड़कियां खुद ही और अपने परिवार की इज्ज़त के डर से किसी भी तरह की शिकायत करने की वजह इन सबको नजरअंदाज कर देती हैं|हाल ही में आगरा में एक घटना सामने आई जिसमे की कुछ लड़कों ने एक लड़की को छेड़ा और अपने साथ चलने को कहा| विरोध करने पर लड़की को बाल पकड़कर सरेआम पीटा गया और वह मनचले भाग निकले| अगले ही दिन फिर ऐसी घटना सुनने को मिली| कुछ ही दिन बीते थे कि एक लड़की जोकि जयपुर से परीक्षा देकर लौट रही थी उसे कुछ लोगों ने बाँध दिया और उसके पर्स से ऐटीएम निकलकर पासवर्ड पूछकर ४०००० रुपये निकलकर उसे तालाब के किनारे फेंक के चले गए| बांदा के शीलू बलात्कार मामले से तो कोई भी अनजान नहीं जिसमे विधायक जो कि आरोपी थे उन्हें तो ३२ दिन गिरफ्त में लिया गया और पीड़ित को फर्जी केस बनाकर अगले ही दिन सलाखों के पीछे डाल दिया गया| ऐसा ही एक और मामला अभी सामने आया है जिसमे भरताना के बीएसपी विधायक शिव प्रसाद यादव का नाम सामने आया है| क्या यह है आज हमारी सशक्त नारी की पहचान?? सीता,गार्गी,रानी लक्ष्मी बाई, कल्पना चावला जैसी महान स्त्रिओं की जन्मभूमि पर स्त्रिओं का यह कैसा हश्र है?? कुछ लोगों के लिए औरत सिर्फ दिल बहलाने वाली चीज है तो कुछ stylish बाल बिखरते हुए नए जवान लड़के कहते हैं "लड़कियों को उनकी औकात दिखानी चाहिए..वह हमेशा लड़कों से पीछे रहेंगी" पर वह यह भूल जातें हैं की उन्हें जन्म देने वाली भी कोई लड़की थी और रक्षाबंधन वाले दिन उनकी कलाई पर राखी बंधने वाली भी एक लड़की ही है| चार-चार लड़कियों से झूठे झूठे वादे करके अपने आप को रहीस समझने वाले ये भूल जाते हैं कि उन्हें भी संतान के रूप में लड़की ही मिल सकती है| पर नहीं इतनी लम्बी सोच रखता ही कौन है?? फैसबुक पे अभी हाल ही में किसी ने चाचा नेहरु की तस्वीर किसी औरत के साथ लगायी और उसके नीचे लोगों के भद्दे भद्दे comments और गाली-गलोच लिखी| पर ये फूहड़ लोग ये भूल गए की आज देश में बहुत से नौजवान लड़कियों को छेड़ते रहतें हैं और उन्हें यह तक नहीं पता की देश के प्रधानमंत्री कौन हैं??उनकी अपनी ही दुनिया है जिसमे असली मुद्दों की कोई जगह नहीं|पर नहीं जो अपनी जिंदगी जीकर जा चुका है लोग उसकी गलतियाँ निकालते हैं, खुद के अन्दर झाँक के देखने की कोशिश भी नहीं करते| अब जरुरत है इन सबको रोकने की और इसके लिए हम सबको आगे आना होगा, पहल करनी होगी| अब valentine day का विरोध करने वालों को भी यह समझ लेना चाहिए की असली मुद्दा वह नहीं जो वह उठा रहें है असली मुद्दे कुछ और ही हैं, उन्हें भी इस मुद्दे पर आन्दोलन करना चाहिए| प्रशासन को भी इन घटनाओं की तरफ ध्यान देना चाहिए और आरोपियों के खिलाफ शक्त से शक्त कार्यवाही करनी चाहिए ताकि सबके घर की औरतें चैन से निकल सकें| नारी पुरुष की कमजोरी तो हो सकती है पर कमजोर कभी भी नहीं हो सकती इसलिए अब नारीओं को भी सजग होना पड़ेगा और इन घटनाओं को आड़े हाथ लेना चाहिए तभी स्तिथि में सुधार आएगा|
अब आखिरी में में फिर वही बात कहूँगा की अगर आपको मेरे विचार गलत लगे हो या कुछ भी हो जो कि ठीक न हो तो मुझे अवश्य बताएं| में उसमे सुधार कि पूरी कोशिश करूँगा| आप मुझे SAGARGUJRATI1@GMAIL.COM पर लिख सकतें है| मेरा ब्लॉग पड़ने के लिए धन्यवाद| फिर मिलेंगे|
आपका आभारी,
सागर गुजराती

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