सिस्टम का बला-त-कार दिल्ली में पांच साल की गुड़िया के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आते ही जनता का आक्रोश फूट पड़ा। 16 दिसंबर को दामिनी के साथ हुए बलात्कार के बाद उपजा देश की जनता का गुस्सा अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि पांच साल की बच्ची के साथ जघन्य बलात्कार की घटना सामने आ गई। हालांकि इस बीच पूरे देश में कई बलात्कार की घटनाएं सामने आर्इं और संसद में बैठे नीति निर्धारकों ने इस मुद्दे पर बहस करने के साथ ही कानून में भी संसोधन किए लेकिन इसके बावजूद ऐसी घटनाएं अनवरत जारी रहीं। लेकिन लोगों का गुस्सा
अंग्रेजों ने पुलिस का गठन सुरक्षा के साथ ही भारतीय जनता को डराने और उनसे गुलामी करवाते रहने के लिए किया था। आज तक पुलिस की ट्रेंनिग में कुछ खास सुधार नहीं हुआ और अब स्वतंत्र भारत में भी मानो अंग्रेजों की पुलिस तैनात है जो आए दिन जनता का शोषण करती रहती है। हालांकि पुलिस सुधार के नाम पर कई सेमिनार आए दिन होते रहते हैं कि लेकिन उसका नतीजा क्या होता है इसका अंदाजा इन घटनाओं से लगाया जा सकता है। एक ऐसा समय जब देश के हर कोने से महिला सशक्तीकरण की मुहिम को मजबूती मिल रही हैं, उसी समय अब पुलिस सुधार की मांगे भी उठ रही हैं।
इस बार बलात्कार के विरोध में तो था ही लेकिन पुलिस के अभद्र रवैये ने एक नई बहस और गुस्से को जन्म दे दिया। अस्पताल में कुछ लड़कियां बच्ची को देखने और उसे एम्स में भर्ती कराने की मांग को लेकर पहुचीं।
लड़की को दो जोरदार चांटे मार दिए। लड़की के कान से खून निकलने लगा। जिसने भी ये नजारा देखा, सकते में आ गया। लोगों का गुस्सा अपराधी को पकड़ने और सजा दिलाने से शुरु हुआ था जिसमें पुलिस सुधार के मुद्दे को जोड़ दिया गया। अभी इस घटना को कुछ ही घंटे बीते थे कि उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से भी कु छ ऐसी ही खबर आने लगी। यहां भी रक्षकों ने मानवता को तार तार करते हुए पुलिसिया वर्दी पर दाग लगवाया। अलीगढ़-दिल्ली रोड के बन्ना देवी थाना क्षेत्र में छह साल की बच्ची की मौत को लेकर लोग आक्रोशित हो गए। उसकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मासूम बच्ची के साथ रेप हुआ और उसकी गला दबाकर हत्या कर दी गई। विरोध प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी। अलीगढ़ में यूपी पुलिस का जो चेहरा सामने आया है उससे यूपी की कानून व्यवस्था की कलई खुली है। एक मासूम बच्ची के साथ रेप हुआ, परिजनों ने इंसाफ मांगा तो लाठियां मिलीं और फिर एसएसपी का बेतुका बयान सामने आया। हत्या और बलात्कार के बाद घरवालों के जख्म पैसों से भरने की कोशिश की जाने लगी। प्रशासन ने परिवार को 20 हजार का चेक दिया है तो आंसू पोंछने आए एक नेता ने पांच हजार रुपये पकड़ा दिए। हालांकि दोषी पुलिसकर्मियों को संस्पेंड किया गया लेकिन इसने एक बड़ा प्रश्न लोगों के सामने खड़ा किया कि क्या ऐसे वर्दीधारी समाज में महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित कर पायेंगे जो महिलाओं की इज्जत करना ही नहीं जानते? जो महिलाओं पर हाथ उठाकर अपनी मर्दानगी और वर्दी का रौब दिखाते हैं। ये तो चंद पुलिसकर्मी थे जो सामने आ गए। लेकिन ये बात भी सब जानते हैं कि पुलिस विभाग में ऐसे लोगों की एक लंबी फौज है जो आज भी जनता का शोषण किसी न किसी तरीके से कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों शोषण की शिकायत लेकर एक लड़की थाने पहुंची तो पुलिसवालों ने उसे ही हवालात में डाल दिया। आए दिन पुलिस की कारगुजारियों के किस्से सामने आते रहते हैं लेकिन सुधार के नाम पर आज तक कुछ नहीं हुआ।
सच कहा , पुलिस की ट्रेनिंग में बदलाव बहुत ज़रूरी है !
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